Welfare Wing


The main objectives of the Boards are:

1.      The socio. Economic uplift of workers.

2.      Create an awareness & instill self confidence.

3.      Mobilize the workers for the protection or their interest and

4.      Enable the workers to get absorbed in the main stream of society.



Out of total workforce 90% of the workers are working in unorganized sector like agriculture industries, fisheries, forestry, plantation, and livestock. A condition of  unorganized rural workers is pathetic and continues to deteriorate further due to uncertainties of employment and migration. since the workers in the unorganized rural sector in general suffers from low earning and lack of  stability, it has not been possible to extended them the benefits of a contribution oriented or employers ability oriented social security scheme. Various social security schemes are implemented by the Govt. through rural workers welfare board. Which is aimed to ameliorate the conditions of rural labour but the result is not to the expectations, because government efforts alone would not bring change in the conditions of these poorest among the poor like landless agriculture labour. What is required is the creation of awareness and leadership among this class of people, therefore organizing them is the most important task. Organizing rural labour is not an easy task as working conditions very from place to place as well as workers are scattered over a large area and are subjected to exploitation and other vices like liquor and bondage etc. Legislations for such rural labour have only marginal effect. The Govt. has initiated several measure for awareness among rural workers as well as to organize them through the rural workers welfare centre. Social Security  measure give umbrella protection to them but what is required is dedication and sustained efforts on the part of executives vies-a-vies the active participation of labours themselves.


Building and Construction Workers Welfare Board

With the object to regulate the employment and conditions of service and to provide safety, health and welfare measure for the building and other construction workers, which is most vulnerable agreementof the second largest unorganized labour sector in india after agriculture, The central government has enacted the legislations, namely-"The Building and Other Construction Workers ( Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 1996" Responsibility for enforcement of the Act primarily lies with the state government/UTs.


With the on-going infrastructure development, a large number of workers are engaged in the construction activities in the state. The aim of the board is to register all these workers so that they may be able to receive benefits under various welfare schemes run by the board.


छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल की गतिविधियां 2010


छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण निधि अधिनियम 1982:

छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के गठन का मुख्य उद्देष्य श्रमिकों एवं उनके आश्रितों के लिये विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित करना। श्रमिकों के परिवार की महिलाओं को विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जाकर सामाजिक उन्नयन करना एवं श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा में सहयोग प्रदान कर षिक्षा के लिये प्रोत्साहित करना। इस तरह मंडल श्रमिकों एवं उनके परिवार के सामाजिक, आर्थिक एवं बौद्धिक विकास में सहयोग प्रदान करता है।

छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण निधि अधिनियम 1982 के प्रावधानों के तहत छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल श्रमिक कल्याणकारी गतिविधियों का संचालन करता है। छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल में दिनांक 12.03.2010 से माननीय श्री अरूण चैबे अध्यक्ष एवं माननीय श्री ज्ञानेन्द्र और उपाध्यक्ष पद पर पदस्थ है।

अधिसूचना क्रमांक एफ 10-1/2011/16 दिनांक 01-01-2011 द्वारा प्रति छैमाही अभिदाय राशि में 01 जनवरी 2011 से वृद्धि की गई है। नियोजक अभिदाय रूपये 45/- प्रति श्रमिक एवं श्रमिक अभिदाय राशि रूपए 15/- प्रति श्रमिक एवं नियोजक द्वारा न्यूनतम देय अभिदाय राशि रूपए 1500/- निर्धारित है।


भवन एवं अन्य सनिर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्तों का विनियमन) अधिनियम 1996

इस अधिनियम के अंतर्गत निर्माण श्रमिकों की सेवा शर्तो तथा उनकी सामाजिक सुरक्षा के संबंध में कल्याण कारी योजनाए प्रवर्तित करने के प्रावधान है। अधिनियम में निर्माण कल्याण योजनाओं के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से मंडल के गठन का प्रावधान है। मंडल द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत निर्माण श्रमिकों का पंजीयन कर उन्हें विभिन्न योजनाओं के हित लाभो से संरक्षण प्रदान किया जाता है।


स्थापनाओं का पंजीयन:

अधिनियम को उन स्थापनाओं में प्रभावशील करना अनिर्वाय किया गया जहां दस अथवा अधिक निर्माण श्रमिकों का नियोजन हो। वर्ष में किसी भी दिन दस अथवा अधिक निर्माण श्रमिकों के नियोजन वाली स्थापनाओं को उपयुक्त सरकार द्वारा नियुक्त रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी के यहां रजिस्ट्रीकरण कराना अनिवार्य किया गया है। स्थापनाओं के रजिस्ट्रीकरण संबंधी प्रावधान का उद्देश्य यह है कि निर्माण श्रमिकों के अस्थायी नियोजक तथा जोखिमपूर्ण कार्य की स्थिति में नियोजक द्वारा सुरक्षा के उचित उपाय एवं दायित्व वहन करने संबंधी प्रावधानो को विनियमित किया जायें।


छ.ग. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्तों का विनियमन) नियम 2008

                भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्तों का विनियमन) अधिनियम 1996 की धारा 40 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग कर राज्य शासन द्वारा नियम 2008 बनाये गयें। जिसके अंतर्गत कल्याणकारी योजनाओं का संचालन सुनिश्चित करने के लिए छ0ग0 भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल का गठन 5 सितम्बर 2008 को किया गया है। 

छ.ग. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन तथा शर्तो का विनियमन) अधिनियम 1996 एवं उपकर अधिनियम के तहत विभाग द्वारा किये गये कार्यवाहियों का विवरण |

क्रमांक संपादित निरीक्षण दायर अभियोजन पंजीयन संकलित उपकर राशि
1. 1252 157 21,577 रू. 25,90,00,959/-